अपराजिता

 TEA GARDEN से TISS तक आना इतना भी आसान नहीं था उनके लिए


मैं बात कर रहा हूँ उस लड़की की, जो KINDERGARTEN, GRADE 1 और 2 में थी; उसे कभी पढ़ने का मौका ही नहीं मिला। उम्र के हिसाब से उनको सीधा GRADE 3 में दाखिला कर दिया जाता। GRADE 10 के बाद उनकी पढ़ाई में डोरी बांधना पड़ता है घर की आर्थिक स्थिति की वजह से। फिर वो 2 शॉल काम किया। उसके बाद एक संस्था की मार्गदर्शन से वो मंगलौर में BSW में दाखिला लिया। उसके बाद TISS में आया MA पढ़ने। सपनों की सहर में subaltern students को सवारना कितनी कितनी चुनौतियां हैं, खासकर academia में। वो जिंदगी की उलझन से, कभी कभी घर की आर्थिक परिस्थितियां उनके रीढ़ की हड्डियों को तोड़ देती है और वो गिर जाती है, थक जाति हे, फिर भी वो चलने, आगे पैर बढ़ाने में कभी रुकना नही शिखा।


कहानी तो हम पढ़ते मगर उन में जो चरित्र होते उनको हम सायद मिल नहिं पाते। मैं जब भी मिलता हूँ तो मुझे एक खुशी मिलती है ऐसे "अपराजिता" लड़की से मिलकर...


ऐसे TISS TREE की पत्ती की तरह हमेशा हरा यानी EVERGREEN रहना।


~बिष्णु

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