Read more

No title

You are greeting the public in the name of the god of a particular religion. By doing this, you are assuming that there is onl…

No title

ଜାଣିଛି ପଦ୍ମାଳୟା, ତୁମକୁ ପାଇବାର ଅଦମ୍ୟ ଅଭିଳାଷ କେବଳ ସ୍ୱର୍ଣ୍ଣ ମୃଗ ମରୀଚିକା ସଦୃଶ। ବାଳୁତରେ ମାଆ ସବୁ ଅଳି ଅଝଟ ସମ୍ଭାଳୁଥିଲା, ଭାବିଥିଲି ଏ ଯୌ…

Thoughts

हम इतनी छोटी-छोटी चीज़ों में क्यों परेशान हो जाते हैं, क्यों हार मान लेते हैं? इस गर्मी में कभी छत से पानी टपकता है, कभी बिजली…

हो सके-2

हो सके-2 हो सके— हम न मिल पाएँ किसी चाय की मेज़ पर, न हँस पाएँ किसी मूवी डेट के बहाने। हो सके— हमारी मोहब्बत किसी भीड़…

हो सके

हो सके हो सके— हम न मिल पाएँ किसी चाय की मेज़ पर, न जा पाएँ किसी मूवी डेट पर। हो सके— हम मिलें ज़रूर, पर उस तरह नहीं जै…

जल, जंगल, ज़मीन

जल, जंगल, ज़मीन वे आए और बोले— “हम तुम्हें नौकरी देंगे, तुम्हारी झोपड़ी को महल बना देंगे। तुम्हारे मारंग बुरु और बड़ादेव क…

धूल में उकेरी हुई दुनिया

धूल में उकेरी हुई दुनिया बिबेक गाँव से मुंबई आया था— एक प्रतिष्ठित संस्थान में पढ़ने के लिए। कई लोगों के लिए यह बस एक उपलब्धि…

Load More
That is All

Literature