Thoughts

 हम इतनी छोटी-छोटी चीज़ों में क्यों परेशान हो जाते हैं, क्यों हार मान लेते हैं?


इस गर्मी में कभी छत से पानी टपकता है, कभी बिजली चली जाती है।

गर्मी में ठीक से नींद भी नहीं आती।

लेकिन फिर सोचता हूँ , कम से कम हमारे पास घर तो है।


ज़रा उस इंसान के बारे में सोचो,

जिसे रहने के लिए घर तक नहीं मिला।

एक घर मिला भी, तो धर्म बदलकर रजिस्टर में नाम लिखवाना पड़ा।

और अंत में धर्म के नाम पर गुंडों ने जान से मारने की धमकी दी,

जिसके कारण उन्हें वह घर भी छोड़ना पड़ा।


बचपन में उन्हें अलग बैठाया जाता था,

सिर्फ इसलिए क्योंकि वे तथाकथित “नीची जाति” में पैदा हुए थे।

यहाँ तक कि खुद से पानी पीने का अधिकार भी नहीं था।


फिर भी वे कभी हारे नहीं।

उन्होंने अछूतों के पानी के अधिकार के लिए संघर्ष किया।

विदेश जाकर पढ़ाई की।

जो दर्द उन्होंने खुद झेला,

वह दूसरों को न झेलना पड़े, इसके लिए पूरी ज़िंदगी लड़ते रहे।

और संविधान के माध्यम से सबको अधिकार दिए।


प्रेरणा का दूसरा नाम ही बाबासाहेब है।

हमारे असली हीरो पहले से ही बाबासाहेब हैं।


जो रुके नहीं।

जो झुके नहीं।

जिन्होंने न झुकना सिखाया, न रुकना।


फिर किस बात की कायरता?


~ बिष्णु नारायण महानंद





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