Home जिंदगी byBishnu Mahanand -April 23, 2026 0 रात में जागना भी थासमय से लड़ना भी थाऔर खुद से खुद को जूझना भी थारात की अंधेरे में जाग के कल उजाला भी देखना थामुश्किलों को पार कर केरिमोट से मेट्रो आना भी थाहर दिन मर मर के जिंदा भी होना थालोगों की मजाक बनके अपना जगह बनाना भी था...विष्णु Facebook Twitter