जिंदगी

 रात में जागना भी था

समय से लड़ना भी था

और खुद से खुद को जूझना भी था

रात की अंधेरे में जाग के 

कल उजाला भी देखना था

मुश्किलों को पार कर के

रिमोट से मेट्रो आना भी था

हर दिन मर मर के 

जिंदा भी होना था


लोगों की मजाक बनके 

अपना जगह बनाना भी था

...

विष्णु

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