शायद बता नहीं पाएंगे
Madras Talkies,
नागोरी, और Red Velvet की मिठास में,
कितनी दफा प्रेम हुआ,
कितनी बार दिल जुड़ा—
शायद बता नहीं पाएंगे।
अन्ना की चाय टपरी,
साइड की पान की ठेला,
और अशापुरा की वो छोटी-सी दुकान—
छोटी-छोटी चीज़ों में भी खुश हो जाना,
यहाँ तो लोग सुख में रहकर भी दुख ढूँढ लेते हैं,
शायद बता नहीं पाएंगे।
SDML लाइब्रेरी और वो Quadrangle,
कितनी बार हाथ थामे रखा,
कितनी दूर साथ चलने का ख्वाब देखा—
अकादमिक सफर में,
किसी के साथ यूँ ही कदम मिलाना,
शायद बता नहीं पाएंगे।
और यहाँ…
लोग हिसाब रखते हैं साहब,
कौन कितना साथ चला,
कौन कितना करीब था—
पर जो बिना गिने जिया गया,
उस प्रेम का मोल
शायद कभी बता नहीं पाएंगे।