Muskan: Differently abled, Not Disabled

 कितना हसीन दिख रही थी वह लड़की white shirt and black formal dress में। Placement के लिए photo shoot चल रहा था और वह भी खूब उत्साहित होकर खुद को भी माहौल में शामिल किया था।

उनके किसी से दुश्मनी नहीं है। क्यों किसी से लड़ाई करेगा? वह तो जिंदगी भर खुद की जिंदगी से लड़ रही है। कितना मुश्किल है ना एक हात में सबकुछ करना, अपने जिंदगी को संवारना मगर वह एक हात में सब कुछ कर रही है। 


Frequently मिलते हैं हम उनसे, वे मेरी लिखी हुई कहानी पढ़ते हैं और मुझे अपने views बताते हैं। उसने मेरी लिखी हुई कहानी "अपराजिता" को बेहद पसंद किया था। में बोला next time तुम्हें मेरे कहानी की एक चरित्र बना लूंगा। आज कहानी का शीर्षक अलग हो सकता है मगर वह एक "अपराजिता" से कम नहीं है। जब भी मैं उनको campus में मिलता हूँ तो मुझे एक मुस्कान के साथ inspiration भी मिलता है। इतने उलझनों के साथ भी वह अपने कदम आगे बढ़ा रहे है मुस्कान के साथ मगर हम छोटे छोटे उलझनों से बिबश हो जाते।

बंगाल से एक underprivileged background से मुंबई जैसे metro city के prestigious institution में पढ़ना इतना सहज नहीं था। पढ़कर अपनों जैसे लोगों के लिए काम करना छोटी चीज नहीं है, बड़ा विचार है।

वह हमेशा  एक मुस्कान के साथ पढ़ाई कर रही है और खुद को एक silent revolution की एक सेना में शामिल किया है। युद्ध में हारना उतनी बड़ी बात नहीं है। अगर युद्ध में नहीं सामिल नहीं  हो तो खुद को अबशोस लगेगा और दुनिया बोलेगा। युद्ध ये है कि जिंदगी से जितना और साबित करना चाहता है, I am Differently Abled, Not Disabled.

~विष्णु

Post a Comment (0)
Previous Post Next Post