मैं उनसे मोहब्बत करता हूँ,
मोहब्बत के स्वरूप में कुछ देना चाहता हूँ।
मैंने पूछा — "तुम्हें क्या अच्छा लगता है,
जो अभी तुम्हारे पास नहीं है?"
वो चुप रहीं,
पर निगाहों ने कुछ कह दिया,
फिर हल्के से बोलीं — “कहना नहीं है,”
और मुस्कुराकर बात बदल दी।
मैंने फिर कहा —
“कुछ किताबें, कुछ तोहफ़े,
या कोई पोस्टकार्ड,
जहाँ हमारे महामानवों के संदेश लिखे हों।”
वो धीरे से ‘ना’ में सिर हिला दीं।
कुछ पल बाद,
उन्होंने एक इंस्टाग्राम वीडियो भेजी —
एक कमरे की, जहाँ पढ़ाई का कोना था,
और बगल में एक बिस्तर भी।
मैं मुस्कुराया,
लिखा — “ओह! ग्रेट!”
पर मन के भीतर
कुछ गहराई से हिला,
कुछ कोमल-सा पिघल गया।
सोचने लगा —
वो अपने सपनों को बुनना चाहती है,
जैसे संबलपुरी साड़ी —
महँगी भी, सुंदर भी,
हर धागे में मेहनत, हर रंग में आशा।
वो शायद कह नहीं पाई,
पर मैंने सुन लिया —
उसका सपना,
उसका संसार,
और उसकी ख़ामोश मोहब्बत का इज़हार।