उसकी ख़ामोश मोहब्बत

उसकी ख़ामोश मोहब्बत

मैं उनसे मोहब्बत करता हूँ,
और मोहब्बत के स्वरूप में
उन्हें कुछ देना चाहता हूँ।

मैंने पूछा—
“तुम्हें क्या अच्छा लगता है,
जो अभी तुम्हारे पास नहीं है?”

वो चुप रहीं,
पर उनकी निगाहों ने बहुत कुछ कह दिया।
फिर हल्के से बोलीं—
“कहना नहीं है,”
और मुस्कुराकर बात बदल दी।

मैंने फिर कहा—
“कुछ किताबें, कुछ तोहफ़े,
या कोई पोस्टकार्ड,
जिन पर हमारे महामानवों के संदेश लिखे हों।”

उन्होंने धीरे से
‘ना’ में सिर हिला दिया।

कुछ पल बाद,
उन्होंने एक इंस्टाग्राम वीडियो भेजी—
एक छोटे-से कमरे की,
जहाँ एक सजा हुआ पढ़ाई का कोना था।

सामने दीवार पर तस्वीरें थीं—
B. R. Ambedkar,
Jyotirao Phule,
और Savitribai Phule की।

और बगल में
एक सादा-सा बिस्तर रखा था।

मैं मुस्कुराया,
लिखा— “ओह! ग्रेट!”
पर मन के भीतर
कुछ गहराई से हिल गया,
कुछ कोमल-सा पिघल गया।

सोचने लगा—
वो अपने सपनों को बुनना चाहती है,
उसी राह पर चलना चाहती है
जिस पर अंबेडकर और फुले दंपति चले थे।

महँगा नहीं,
पर सुंदर और अर्थपूर्ण जीवन—
संघर्ष के साथ, समाज के लिए।

वो जीना चाहती है किताबों के साथ,
और उन्हें ही अपना अस्त्र बनाकर
लड़ना चाहती है—
समाज में फैली असमानता के विरुद्ध,
बराबरी के हक़ की लड़ाई।

जैसे अंबेडकर और फुले दंपति ने लड़ी थी।

वो शायद कह नहीं पाई,
पर मैंने सुन लिया—
उसका सपना,
उसका संसार,
और उसकी ख़ामोश मोहब्बत का इज़हार।

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