प्रेम के रंग में मैं खुश था एक दिन,
जब तुमने मेरे चेहरे पर प्यार का रंग लगाया था।
लेकिन आज मैं कैसे खुश हो सकता हूँ,
जब तुम एक महिला को जलाकर जश्न मना रहे हो?
और उस की खार को
तुम रंग समझ कर मुझे लगाने आए हो!?
तुम दर्द को त्योहार बनाकर मना रहे हो,
और मुझे आंसू का रंग लगाने आए हो।
मेरा दिल इस दृश्य के खिलाफ विद्रोह करता है,
और प्यार की लौ के लिए तरसता है जो तुम्हारी रोशनी में खो गई है।
#क्रांति
#प्रेम_ही_क्रांति है
~ विष्णु