Priya

 प्रिय,

हम कहां मिले थे, कैसे मिले थे और कब मिले थे, पता नहीं। मगर एक मुस्कान के साथ मिले होंगे या तो एक कहानी के जरिए मिले होंगे। कुछ दिन बाद तुम चले जाओगे; पता नहीं , हम फिर कैसे मिलेंगे, कब मिलेंगे, कहां मिलेंगे!? मगर जिंदगी के राहों पे मिलना, लौट के आना एक मुस्कान के साथ, कुछ कहानी लेकर। इच्छा होता है, तुम्हें एक लंबा सा चिठ्ठी लिखूं, मगर हृदय में जमा हुए अभिमान, तुम्हारे जाने के विद्रोह, दिल की दरिया को बहा के लिखना साहस नहीं है मुझ में।


तुम से कोई बड़ा उम्मीद नहीं है मेरा। बस मुस्कान के साथ मेरे साथ परछाई की तरह मेरे साथ हमेशा रहना। हमेशा मुस्कुराना, शिक्षा किसी के पास नहीं पहुंच पा रहा है तो उनके लिए सहारा बनना। 


मन करता है, तुम्हारे साथ बहुत सारे पल को कैमरे के जरिए कैद करूं, मगर होता कहां है। मन करता है, मुंबई में तुम्हारे साथ एक्सप्लोर करूं, मगर होता कहां है।  


तुम तुम्हारे ख्वाब को पूरा करो। तुम्हारे अच्छे भविष्य के लिए शुभकामनाए। तुम और मुस्कुराना, तुम और आगे बढ़ना।

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